🚩 श्री बजरंग बाण

सचित्र सिद्ध पाठ और हिंदी अर्थ सहित

जय श्री राम! जब जीवन में घोर विपत्ति आ जाए, शत्रु परेशान कर रहे हों, या कोई असाध्य रोग हो, तो shri bajrang baan का अचूक पाठ ढाल बनकर रक्षा करता है। महाबली हनुमान जी को त्वरित प्रसन्न करने और उनसे सहायता मांगने के लिए bajrang baan एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र स्तोत्र है। मान्यता है कि भक्त अक्सर अपनी विशेष मनोकामना के लिए hanuman chalisa and bajrang baan का पाठ एक साथ करते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से hanuman bajrang baan का नित्य पाठ करता है, उसके जीवन से नकारात्मक शक्तियां हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। यदि आप इंटरनेट पर सही bajrang baan lyrics या bajrang baan hindi lyrics खोज रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही स्थान पर हैं। हमने यहाँ सम्पूर्ण bajrang baan hindi अर्थ के साथ उपलब्ध कराया है। कई साधक अपनी पूर्ण सुरक्षा के लिए hanuman chalisa bajrang baan sankat mochan तीनों का एक साथ पाठ करते हैं। विपत्ति के समय भक्तों के मुख से केवल bajrang baan, bajrang baan ही निकलता है। यह hanuman bajrang baan lyrics अचूक बाण की तरह काम करते हैं। तो आइए, पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ शुरू करें। याद रखें कि इसे bajrang baan hanuman chalisa के साथ जपने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

॥ श्री बजरंग बाण ॥

श्री बजरंग बाण पाठ आरम्भ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ अर्थ: जो भी भक्त पूर्ण निश्चय, प्रेम और विश्वास के साथ हनुमान जी की विनय (प्रार्थना) और सम्मान करता है, श्री हनुमान जी उसके सभी शुभ कार्यों को सिद्ध (सफल) कर देते हैं।

॥ चौपाई ॥

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
अर्थ: हे संतों का कल्याण करने वाले श्री हनुमान जी, आपकी जय हो! हे प्रभु, हमारी विनती सुन लीजिए। अपने सेवकों के काम में अब बिल्कुल भी देरी न करें, बल्कि तुरंत दौड़कर आएं और हमें महा सुख प्रदान करें।
समुद्र पार करते हुए हनुमान जी जैसे कूदि सिन्धु के पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
अर्थ: जिस प्रकार आपने छलांग लगाकर विशाल समुद्र को पार कर लिया था, सुरसा के मुख में प्रवेश करके अपना विस्तार किया था। लंका के द्वार पर रोकने वाली लंकिनी को लात मारकर सुरलोक पहुँचा दिया था। फिर विभीषण को सुख दिया और माता सीता के दर्शन करके परम पद (असीम आनंद) प्राप्त किया था।
बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अर्थ: जिस तरह आपने अशोक वाटिका को उजाड़कर पेड़ों को समुद्र में फेंक दिया था और यमराज के समान भयंकर राक्षसों का अंत किया था। अक्षय कुमार का संहार करके अपनी पूंछ में आग लपेटकर पूरी लंका को लाख (लाह) के समान जलाकर राख कर दिया था, तब स्वर्ग में आपकी जय-जयकार हुई थी।
संजीवनी लाते श्री हनुमान अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
अर्थ: हे मेरे स्वामी! अब आप किस कारण से देरी कर रहे हैं? हे सबके हृदय की जानने वाले अन्तर्यामी, मुझ पर कृपा करें। लक्ष्मण जी को प्राणदान देने वाले प्रभु, आपकी जय हो! कृपया शीघ्र आकर मेरे सभी दुखों का नाश कर दें। हे बल के सागर हनुमान जी, आपकी जय हो!
ॐ हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ओंकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनुमन्त उठावो॥
अर्थ: ॐ हनु हनु हनुमंत! हे हठीले (दृढ़निश्चयी) हनुमान! आप शत्रुओं को वज्र की कील से मार गिराएं। हे महाराज! अपनी वज्र के समान गदा से दुष्टों का नाश करें और अपने इस दास का उद्धार करें। हे महाप्रभु! ओंकार की हुंकार भरते हुए दौड़ें और अपनी वज्र गदा उठाएं।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकरसुवन बीर हनुमन्ता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
अर्थ: (यह हनुमान जी के तांत्रिक बीज मंत्र हैं, जिनसे उग्र शक्ति का आह्वान किया जाता है)। हे बलवान अंजनी पुत्र! आपकी जय हो। हे शिव के अंश वीर हनुमान! आपका स्वरूप अत्यंत विकराल है, आप काल के वंश का नाश करने वाले हैं और श्री राम के काज संवारने वाले सदा रक्षक हैं।
श्री राम की दुहाई भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें हारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
अर्थ: हे प्रभु! सभी भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस, अग्नि बेताल और महामारियों का नाश करें। आपको भगवान श्री राम की शपथ (कसम) है, इन्हें तुरंत हराएं और अपने 'संकटमोचन' नाम की मर्यादा रखें। हरि (श्री राम) की शपथ पाकर आप सत्य सिद्ध हों और हे रामदूत! तुरंत दौड़कर शत्रुओं और दुखों को मार गिराएं।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
अर्थ: हे अथाह शक्तियों वाले हनुमान जी, आपकी जय हो! आपका यह सेवक किस अपराध के कारण इतना दुख पा रहा है? आपका यह दास किसी भी पूजा, जप, तप या नियम-आचरण को नहीं जानता। केवल आपके ही बल पर हम जंगल, उपवन, रास्ते, पहाड़ या घर में किसी भी जगह डरते नहीं हैं।
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी सपथ बिलम्ब न लावो॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
अर्थ: आप माता सीता और भगवान श्री राम के प्रिय दास कहलाते हैं, आपको उन्हीं की शपथ है, अब मेरी सहायता करने में बिल्कुल भी देरी न करें। आकाश में आपकी जय-जयकार हो रही है। आपका स्मरण करते ही असहनीय दुखों का नाश हो जाता है। मैं आपके चरण पकड़कर और हाथ जोड़कर आपको मना रहा हूँ, इस कठिन समय में मैं आपके सिवा किसे पुकारूँ?
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अर्थ: हे प्रभु उठिए, उठिए और चलिए! आपको श्री राम की दुहाई (कसम) है। मैं आपके पैरों पड़ता हूँ और हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूँ। (ॐ चं चं... यह चंचलता और शीघ्रता का मंत्र है। ॐ हनु हनु... हनुमान जी की शक्ति का मंत्र है)। हे चंचल कपि! आपकी ॐ हं हं की एक हुंकार से ही दुष्टों (खल) के दल सहम कर भाग खड़े होते हैं।
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनंद हमारो॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्रान की॥
अर्थ: आप अपने सेवक का तुरंत उद्धार करें, आपका स्मरण करते ही हमारे हृदय में आनंद भर जाता है। यह जो शक्तिशाली 'बजरंग बाण' है, इसे आप जिसे मारेंगे, उसे फिर संसार में कौन बचा सकता है? जो भी व्यक्ति सच्चे मन से इस 'बजरंग बाण' का पाठ करता है, स्वयं श्री हनुमान जी उसके प्राणों की रक्षा करते हैं।

॥ दोहा ॥

बजरंग बाण संपूर्ण यह बजरंग बाण जो, जापैं उर धरि ध्यान।
तेहि बिधि भूत प्रेत सब, काँपैं सुनतहिं नाम॥

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ अर्थ: जो भी भक्त इस बजरंग बाण का हृदय में ध्यान धरकर जाप करता है, उसका केवल नाम सुनते ही सभी भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियां कांपने लगती हैं। जो व्यक्ति प्रेम और विश्वास के साथ श्री हनुमान जी का भजन और ध्यान करता है, उसके सभी शुभ कार्यों को श्री हनुमान जी हमेशा सिद्ध कर देते हैं।