जय श्री राम! भगवान शिव के रुद्रावतार और श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान जी की कृपा पाने के लिए hanuman chalisa का पाठ सबसे उत्तम माध्यम माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित shri hanuman chalisa को प्रतिदिन पढ़ने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर हो जाते हैं। यहाँ आप full hanuman chalisa का शुद्ध पाठ अर्थ और चित्रों के साथ कर सकते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से jai hanuman chalisa का उच्चारण करता है, उसके जीवन में सदा मंगल होता है। कई भक्त इंटरनेट पर hanuman chalisa text या hanuman chalisa written रूप में खोजते हैं, इसलिए हमने इस पृष्ठ पर hanuman chalisa hindi mein (अर्थात hanuman chalisa hindi) उपलब्ध कराया है। इस पवित्र chalisa के हर दोहे और चौपाई में अपार शक्ति है। आप इसे एक शक्तिशाली hanuman chalisa mantra भी मान सकते हैं। आइए, पूरे भक्ति भाव से shree hanuman chalisa का यह सचित्र पाठ शुरू करें।
॥ दोहा ॥
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ अर्थ: श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके, मैं श्री रघुनाथ जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) चारों फल देने वाला है।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ अर्थ: हे पवनपुत्र! मैं स्वयं को बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें और मेरे सभी कष्टों और दोषों को दूर करें।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ अर्थ: हे पवनपुत्र! मैं स्वयं को बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करें और मेरे सभी कष्टों और दोषों को दूर करें।
॥ चौपाई ॥
1. जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
अर्थ: हे ज्ञान और गुणों के सागर श्री हनुमान जी, आपकी जय हो! हे वानरों के ईश्वर, तीनों लोकों में आपकी कीर्ति उजागर है, आपकी जय हो।
2. राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
अर्थ: आप भगवान श्री राम के दूत हैं और अतुलनीय बल के धाम हैं। आप माता अंजनी के पुत्र हैं और 'पवनसुत' के नाम से जाने जाते हैं।
3. महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
अर्थ: हे महावीर! आप अत्यंत पराक्रमी और वज्र के समान अंगों वाले हैं। आप खराब बुद्धि को दूर करने वाले और अच्छी बुद्धि वालों के साथी हैं।
4. कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
अर्थ: आपका रंग सोने के समान चमकीला है और आप सुंदर वेशभूषा में सुशोभित हैं। आपके कानों में कुंडल हैं और बाल घुंघराले हैं।
5. हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
अर्थ: आपके एक हाथ में वज्र और दूसरे में ध्वजा (झंडा) सुशोभित है। आपके कंधे पर मूंज का जनेऊ बहुत सुंदर लग रहा है।
6. संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
अर्थ: आप भगवान शंकर के अवतार और वानरराज केसरी के पुत्र हैं। आपके तेज और महान यश की पूरे संसार में वंदना होती है।
7. बिद्याबान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
अर्थ: आप अत्यंत विद्यावान, गुणवान और चतुर हैं। आप भगवान श्री राम के कार्यों को करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
8. प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
अर्थ: आप भगवान श्री राम की कथा और चरित्र सुनने के अत्यंत रसिक हैं। श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता हमेशा आपके हृदय में निवास करते हैं।
9. सूछ्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
अर्थ: आपने माता सीता के सामने अत्यंत सूक्ष्म (छोटा) रूप धारण करके खुद को प्रकट किया, और अत्यंत भयंकर रूप धारण करके लंका को जला दिया।
10. भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥
अर्थ: आपने अत्यंत विशाल (भीम) रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और भगवान श्री रामचंद्र जी के सभी उद्देश्यों को पूरा किया।
11. लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, जिससे प्रसन्न होकर श्री राम ने आपको खुशी से हृदय से लगा लिया।
12. रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
अर्थ: भगवान श्री राम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि "तुम मुझे मेरे भाई भरत के समान ही अत्यंत प्रिय हो।"
13. सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
अर्थ: "हजारों मुखों वाले शेषनाग भी तुम्हारा यश गाते हैं," ऐसा कहकर भगवान श्री राम ने आपको गले लगा लिया।
14. सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
अर्थ: श्री सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा जी, मुनिगण, नारद जी, माता सरस्वती और शेषनाग जी भी आपका गुणगान करते हैं।
15. जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
अर्थ: यमराज, कुबेर और सभी दिशाओं के रक्षक भी आपके यश का वर्णन नहीं कर सकते, तो फिर कवि और विद्वान भला कैसे कर सकते हैं!
16. तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
अर्थ: आपने सुग्रीव पर बहुत बड़ा उपकार किया। उन्हें भगवान श्री राम से मिलाया, जिसके कारण उन्हें अपनी खोई हुई राजसत्ता वापस मिली।
17. तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
अर्थ: आपके द्वारा दी गई सलाह को विभीषण जी ने माना, जिसके कारण वे लंका के राजा बने, यह बात पूरा संसार जानता है।
18. जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
अर्थ: जो सूर्य यहाँ से हज़ारों योजन की दूरी पर स्थित है, उसे आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया था।
19. प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
अर्थ: आपने भगवान श्री राम की अँगूठी को मुख में रखकर विशाल समुद्र को लाँघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।
20. दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
अर्थ: इस संसार में जितने भी कठिन और असंभव कार्य हैं, वे सब आपकी कृपा से बहुत आसान हो जाते हैं।
21. राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
अर्थ: भगवान श्री राम के दरबार के आप रक्षक हैं। आपकी आज्ञा (इजाज़त) के बिना कोई भी श्री राम तक नहीं पहुँच सकता।
22. सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना॥
अर्थ: जो भी आपकी शरण में आता है, उसे सभी सुख प्राप्त होते हैं। जब आप रक्षक हैं, तो फिर किसी भी बात का डर नहीं रहता।
23. आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
अर्थ: आपके अपार तेज को केवल आप ही सम्भाल सकते हैं। आपकी एक ललकार से तीनों लोक काँप उठते हैं।
24. भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥
अर्थ: हे महावीर! जहाँ आपका नाम जपा या सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच और कोई भी नकारात्मक शक्ति आस-पास भी नहीं फटकती।
25. नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
अर्थ: हे वीर हनुमान जी! जो व्यक्ति निरंतर आपके नाम का जाप करता है, उसके सभी रोग नष्ट हो जाते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।
26. संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
अर्थ: जो भी व्यक्ति मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, हनुमान जी उसे हर प्रकार के संकट से मुक्त कर देते हैं।
27. सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
अर्थ: तपस्वी राजा श्री राम सभी के ऊपर (सर्वोच्च) हैं। उनके भी सभी कठिन कार्यों को आपने बहुत ही सहजता से पूरा कर दिया।
28. और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
अर्थ: जो कोई भी भक्त सच्ची श्रद्धा से आपके पास कोई इच्छा लेकर आता है, उसे जीवन में असीमित फल प्राप्त होता है।
29. चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
अर्थ: आपका प्रताप चारों युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग) में फैला हुआ है। आपका प्रकाश पूरे संसार में प्रसिद्ध है।
30. साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अर्थ: हे श्री राम के प्रिय! आप साधु-संतों की रक्षा करने वाले और राक्षसों (बुराइयों) का नाश करने वाले हैं।
31. अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
अर्थ: माता सीता ने आपको ऐसा वरदान दिया है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियाँ और नौ प्रकार की निधियाँ (धन-संपत्ति) दे सकते हैं।
32. राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
अर्थ: आपके पास 'राम नाम' रूपी सबसे बड़ी औषधि (रसायन) है। आप सदा भगवान श्री रघुनाथ जी के सेवक बने रहते हैं।
33. तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अर्थ: आपका स्मरण करने से भगवान श्री राम की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के सभी दुख दूर हो जाते हैं।
34. अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
अर्थ: आपकी कृपा से मृत्यु के बाद भक्त भगवान श्री राम के परम धाम (वैकुंठ) को जाता है और यदि मृत्युलोक में जन्म लेता है, तो राम-भक्त कहलाता है।
35. और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
अर्थ: हनुमान जी की सेवा करने से ही सभी प्रकार के सुख प्राप्त हो जाते हैं, किसी अन्य देवता पर ध्यान लगाने की आवश्यकता नहीं रह जाती।
36. संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अर्थ: जो भी बलवीर श्री हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सभी संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है।
37. जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
अर्थ: हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर एक कृपालु गुरुदेव की तरह अपनी कृपा बनाए रखें।
38. जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
अर्थ: जो कोई भी व्यक्ति इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा, वह हर प्रकार के बंधनों (कष्टों) से मुक्त हो जाएगा और उसे महान सुख की प्राप्ति होगी।
39. जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
अर्थ: जो भी इस हनुमान चालीसा को पढ़ेगा, उसे निश्चित रूप से सिद्धि (सफलता) प्राप्त होगी, इसके साक्षी स्वयं भगवान शिव (गौरीपति) हैं।
40. तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
अर्थ: गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि वे सदा भगवान श्री राम के सेवक हैं। इसलिए हे नाथ (हनुमान जी)! आप मेरे हृदय में अपना निवास स्थान बना लें।
॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥ अर्थ: हे संकटों को हरने वाले और मंगल रूप वाले पवनपुत्र! हे देवराज! आप भगवान श्री राम, लक्ष्मण जी और माता सीता के साथ मेरे हृदय में सदा के लिए निवास करें।