श्री हनुमान जी की आरती

संपूर्ण आरती पाठ और हिंदी अर्थ सहित

जय श्री राम! भगवान शिव के अंशावतार और श्री राम के परम भक्त पवनसुत हनुमान जी की कृपा पाने के लिए hanuman ji aarti का गायन सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से aarti hanuman ji ki गाता है, उसके जीवन से सभी कष्ट और भय दूर हो जाते हैं। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता हैं और उनकी शरण में आने वाले को karya siddhi hanuman का शुभ फल प्राप्त होता है। यहाँ हमने भक्तों की सुविधा के लिए shri hanuman ji ki aarti का शुद्ध पाठ चित्रों और सटीक हिंदी अर्थ के साथ दिया है। कई भक्त इंटरनेट पर aarti hanuman ji ki lyrics या hanuman ji ki aarti hindi में खोजते हैं, ताकि वे अर्थ के साथ प्रभु की भक्ति कर सकें। आइए, पूरे भक्ति भाव से hanuman baba ki aarti का यह सचित्र पाठ शुरू करें और bajrang bali ki aarti के महापुण्य का लाभ उठाएं।

॥ श्री हनुमान आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर काँपै।
रोग दोष जाके निकट न झाँपै॥
अर्थ: भगवान श्री रघुनाथ जी के शौर्य और कला से युक्त, वीर हनुमान लला की आरती करनी चाहिए। जिनके अपार बल से बड़े-बड़े पर्वत भी थरथरा उठते हैं और जिनके नाम मात्र से रोग, शोक और दोष पास भी नहीं फटकते। यही aarti hanuman lala ki का मुख्य सार है।
अंजनि पुत्र महा बलदायी।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सीय सुधि लाए॥
अर्थ: माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी अत्यंत बलशाली हैं और संतों व सज्जनों की सदा सहायता करते हैं। प्रभु श्री राम ने उन्हें बीड़ा देकर लंका भेजा था, जहाँ उन्होंने रावण की लंका को जलाकर माता सीता की खबर लाकर दी।
लंका जारि असुर संहारे लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सवारे॥
अर्थ: shri hanuman ji ki aarti के इस पद का अर्थ है कि लंका जैसा अजेय किला और समुद्र जैसी गहरी खाई को लांघने में पवनपुत्र हनुमान जी ने जरा भी देर नहीं की। उन्होंने राक्षसों का संहार किया और भगवान श्री राम व माता सीता के बिगड़े कार्यों को संवारा।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि सजीवन प्रान उबारे॥
पैठि पताल तोरि जम-कारे।
अहिरावन की भुजा उखारे॥
अर्थ: जब युद्ध में लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी ने सजीवन (संजीवनी) बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की। वे पाताल लोक में भी घुसे और वहां यमराज जैसे काल अहिरावण की भुजाओं को उखाड़कर उसका वध कर दिया।
बाएँ भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संत जन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
अर्थ: हनुमान जी अपनी बाईं भुजा से दुष्ट राक्षसों के दल का संहार करते हैं और दाईं भुजा से संतों व सज्जनों का उद्धार करते हैं। देवता, मनुष्य और मुनि सभी मिलकर bajrang bali ki aarti उतारते हैं और आपका जयघोष करते हैं।
कंचन थार कपूर लौ छाई कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरति करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरति गावै।
बसि बैकुंठ परम पद पावै॥
अर्थ: स्वर्ण (सोने) के थाल में कपूर की ज्योति जलाकर माता अंजनी स्वयं अपने पुत्र की आरती उतारती हैं। जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ hanuman ji ki aarti hindi में गाता है, वह मृत्यु के पश्चात बैकुंठ धाम में परम पद को प्राप्त करता है।

हनुमान आरती का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के अंत में आरती करने से पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल की क्षमा मिल जाती है। hanuman baba ki aarti का नियमित गान करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है। यदि आप किसी विशेष कार्य में सफलता चाहते हैं, तो karya siddhi hanuman की यह आरती पूरी श्रद्धा से करें।

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