हनुमान आरती सुनने और गाने के अद्भुत लाभ
बहुत से भक्त यह प्रश्न करते हैं कि केवल आरती सुनने या गाने से क्या लाभ होता है? गोस्वामी तुलसीदास जी और विभिन्न पुराणों में स्पष्ट उल्लेख है कि जो भक्त सच्चे हृदय से बजरंगबली की आरती करता है, वह संसार के सभी दुखों से मुक्त हो जाता है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: आरती के समय बजने वाली घंटी और शंख की ध्वनि से घर की सभी नकारात्मक शक्तियां (Negative energy), भूत-पिशाच और नज़र दोष नष्ट हो जाते हैं।
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास: जो लोग डिप्रेशन, डर या घबराहट के शिकार हैं, उन्हें नियमित रूप से हरिहरन जी या रसराज जी महाराज की आरती सुननी चाहिए। इससे आत्मबल बढ़ता है।
- मंगल दोष और शनि दोष से मुक्ति: हनुमान जी की आरती करने वालों को शनि की साढ़ेसाती या मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव कभी परेशान नहीं करते।
- रोग निवारण: "नासै रोग हरै सब पीरा" - आरती के नित्य श्रवण से शारीरिक कष्टों में अभूतपूर्व लाभ मिलता है।
आरती का सही समय: मंगलवार बनाम शनिवार
वैसे तो भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु तंत्र शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार मंगलवार और शनिवार हनुमान जी को विशेष प्रिय हैं।
मंगलवार की पूजा
मंगलवार का दिन हनुमान जी के जन्म और उनके उग्र स्वरूप का प्रतीक है। इस दिन सुबह स्नानादि के बाद लाल आसन पर बैठकर, चमेली के तेल का दीपक जलाकर आरती करनी चाहिए। यह शत्रुओं पर विजय और साहस प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम है।
शनिवार की पूजा
शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा मुख्य रूप से संकट टालने, शनि दोष शांत करने और रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए की जाती है। इस दिन संध्या काल (सूर्यास्त के बाद) पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर आरती गाना अत्यंत चमत्कारी फल देता है।
प्रमुख हनुमान आरतियों का संग्रह
नीचे भारत के सर्वश्रेष्ठ गायकों द्वारा गाई गई आरतियों का संकलन है। अपनी श्रद्धा अनुसार इन्हें प्ले करें।
1. गुलशन कुमार - आरती कीजै हनुमान लला की
भक्ति संगीत के पुरोधा आदरणीय गुलशन कुमार जी द्वारा गाई गई यह आरती करोड़ों भारतीयों की पहली पसंद है। इसकी संगीत रचना इतनी पवित्र और मधुर है कि आँखें बंद करके सुनने पर ऐसा प्रतीत होता मानो साक्षात संकटमोचन हमारे सामने विराजमान हों।
2. रसराज जी महाराज - पारंपरिक आश्रम शैली आरती
रसराज जी महाराज की आवाज़ में एक अलग ही ठहराव और दिव्यता है। जो भक्त एकांत में बैठकर ध्यान लगाना चाहते हैं या अपने घर के मंदिर में दीप जलाकर एक आध्यात्मिक और शांत माहौल बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह पारंपरिक वर्ज़न सबसे उत्तम है।
3. लो-फाई (Lo-Fi) वर्ज़न - मानसिक शांति के लिए
युवाओं के बीच लो-फाई (Lo-Fi) संगीत का चलन बहुत बढ़ गया है। यह रसराज जी महाराज की आरती का एक धीमा और सुकून देने वाला वर्ज़न है। काम के दौरान या रात को सोने से पहले इसे सुनने से दिनभर की थकान और तनाव दूर हो जाता है।
4. महेंद्र कपूर - ओजस्वी और ऊर्जावान आरती
महान गायक महेंद्र कपूर जी ने अपने सशक्त कंठ से इस आरती में जो ऊर्जा भरी है, वह बेमिसाल है। इसमें ढोलक और मंजीरों का बहुत ही शानदार इस्तेमाल हुआ है। यह आरती आपके भीतर एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।
5. लखबीर सिंह लक्खा - हिंदी और अंग्रेजी लिरिक्स के साथ
लखबीर सिंह लक्खा जी अपने तेज़ और उत्साहपूर्ण भजन गायन के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके गाने के अंदाज़ में एक ऐसा जोश है जो किसी भी निराश व्यक्ति में उत्साह भर सकता है। इस वीडियो में लिरिक्स भी दिए गए हैं, जिससे आप साथ-साथ गा सकते हैं।
6. हरिहरन - शास्त्रीय और मधुर आरती गान
हरिहरन जी की आवाज़ में जो मिठास और शास्त्रीय संगीत का ज्ञान है, वह इस आरती को अत्यंत विशेष बनाता है। सुबह-सुबह पूजा करते समय इसे चलाने से पूरे घर में एक बहुत ही पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
7. हरि ओम शरण - शुद्ध पारंपरिक शैली
स्वर्गीय हरि ओम शरण जी की गायकी में एक सादगी भरा दर्द और पुकार होती थी। हारमोनियम और तबले की इस एकदम शुद्ध धुन वाली आरती को सुनकर ऐसा लगता है मानो हम भगवान से सीधा संवाद कर रहे हों।
8. नरेंद्र चंचल - चौंकी और जागरण शैली
नरेंद्र चंचल जी की जगराता शैली में गाई गई यह हनुमान आरती एक अलग ही माहौल बनाती है। यह आरती विशेष रूप से मंगलवार या शनिवार को सामूहिक पूजा या सुंदरकांड के पाठ के बाद बजाने के लिए एकदम उपयुक्त है।
9. प्रेम प्रकाश दुबे - भव्य मंदिर आरती दर्शन
प्रेम प्रकाश दुबे जी के सटीक उच्चारण और शंख-घड़ियाल की ध्वनि से सजी यह आरती आपको बनारस और अयोध्या के घाटों वाली आरती का अनुभव कराती है। यह मानसिक रूप से आपको सीधे भगवान के दरबार में ले जाती है।
10. अनुराधा पौडवाल - ममता और वात्सल्य से पूर्ण
अनुराधा पौडवाल जी की आवाज़ में एक ऐसा वात्सल्य है, जैसे माता अंजनी स्वयं अपने पुत्र हनुमान की आरती उतार रही हों। बहुत ही मीठे अंदाज़ में गाई गई यह आरती बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी को असीम शांति प्रदान करती है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न (FAQs)
हनुमान जी की आरती किस दिशा में मुख करके करनी चाहिए?
हनुमान जी की पूजा और आरती करते समय साधक का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना सबसे उत्तम माना जाता है। मूर्ति या चित्र की स्थापना दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए।
क्या महिलाएं हनुमान जी की आरती कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं बिल्कुल हनुमान जी की आरती कर सकती हैं और चालीसा पढ़ सकती हैं। बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श न करें (सिंदूर या चोला न चढ़ाएं), क्योंकि बजरंगबली परम ब्रह्मचारी हैं।
आरती के लिए कौन सा दीपक सबसे अच्छा होता है?
मंगलवार को चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाना सर्वोत्तम है। यदि आप किसी विशेष संकट के निवारण के लिए शनिवार को आरती कर रहे हैं, तो सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।